Trump the deal maker :क्या ईरान ने ट्रंप को उसी के जाल में फंसा लिया?

Trump The Deal Maker और उनका मिस calculasan
क्या ईरान ने ट्रंप को उसी के जाल में फंसा लिया? | Vimarsh360
भू-राजनीति विश्लेषण

क्या ईरान ने ट्रंप को उसी के जाल में फंसा लिया?

28 फरवरी को युद्ध शुरू हुआ। ट्रंप को उम्मीद थी — दो हफ्ते। आज 12 मार्च है। होर्मुज़ बंद है। तेल $100 पार। और “दुनिया का सबसे बड़ा डील-मेकर” अब पुतिन से मदद मांग रहा है।

✍ Deepak Chaudhary | 12 मार्च 2026 | पढ़ने का समय: ~9 मिनट | भू-राजनीति
13 दिन से चल रहा है यह युद्ध
1,300+ ईरान में मारे गए लोग
$100+ प्रति बैरल तेल की कीमत
50+ ईरानी नेता मारे गए

एक “डील-मेकर” और उसका सबसे बड़ा मिस-कैलकुलेशन

दोस्तों, Donald Trump अक्सर खुद को दुनिया का सबसे बड़ा “डील-मेकर” कहते हैं। उनकी पूरी राजनीतिक पहचान इसी बात पर टिकी है कि वो जहाँ जाते हैं, “जीत” कर आते हैं। लेकिन 28 फरवरी 2026 को उन्होंने जो खेल शुरू किया, वो धीरे-धीरे उन्हीं पर भारी पड़ता जा रहा है।

आज 12 मार्च 2026 है। युद्ध शुरू हुए 13 दिन बीत चुके हैं। ट्रंप ने 3 मार्च को Truth Social पर लिखा था — “उनकी वायुसेना गई, नौसेना गई, नेतृत्व गया। वे बात करना चाहते हैं। मैंने कहा — बहुत देर हो गई।” लेकिन आज Al Jazeera की रिपोर्ट बताती है कि होर्मुज़ अभी भी बंद है, ईरान में मिसाइलें अभी भी चल रही हैं, और ट्रंप के दूत Steve Witkoff से जब CNBC ने पूछा — “यह युद्ध कैसे खत्म होगा?” तो उनका जवाब था — “I don’t know.”

I don’t know.

— Steve Witkoff, Trump के विशेष दूत, CNBC से बातचीत में — 11 मार्च 2026

यह तीन शब्द इस पूरे युद्ध की असलियत बयान कर देते हैं। जिस युद्ध को शुरू करने से पहले सोचा नहीं गया, उसे खत्म करने का रास्ता किसी को नज़र नहीं आ रहा।

पूरी कहानी: कैसे यहाँ तक पहुंचे?

⏱ घटनाक्रम — युद्ध की पटकथा
7 मार्च 2025
ट्रंप का अल्टीमेटम: खामेनेई को खत — परमाणु कार्यक्रम बंद करो, यूरेनियम संवर्धन खत्म करो, प्रॉक्सी ग्रुप्स की मदद बंद करो। समयसीमा: 60 दिन।
अप्रैल-मई 2025
बातचीत के दौर: ओमान, रोम, मस्कट में पाँच दौर की वार्ता। हर बार “constructive progress” का दावा, लेकिन कोई नतीजा नहीं।
जून 2025
पहला हमला: बातचीत जारी थी — और ठीक उसी दौरान अमेरिका ने नतांज़, फोर्दो और इस्फ़हान पर बमबारी कर दी। ईरान के विदेश मंत्री अराघची ने बाद में कहा — “हमें बहुत कड़वा अनुभव हुआ।”
फरवरी 2026
फिर बातचीत: 6 फरवरी को मस्कट में फिर से indirect talks शुरू हुईं। ओमान मध्यस्थ था। उम्मीद जगी।
28 फ़रवरी 2026
युद्ध की शुरुआत: बातचीत के बीच ही अमेरिका और इज़राइल ने खामेनेई को मारकर और ईरान के सैन्य ठिकानों पर हज़ारों बम गिराकर पूर्ण युद्ध की शुरुआत की।
8 मार्च 2026
नया सुप्रीम लीडर: 50+ ईरानी नेताओं के मारे जाने के बावजूद — मोजतबा खामेनेई को नया सुप्रीम लीडर चुन लिया गया। कोई Regime Change नहीं हुआ।
9 मार्च 2026
पुतिन-ट्रंप कॉल: ट्रंप को खुद पुतिन को फोन करना पड़ा — इस युद्ध से बाहर निकलने का रास्ता खोजने के लिए।
11 मार्च 2026
ईरान की शर्तें: राष्ट्रपति पेज़ेशकियान ने युद्ध खत्म करने की तीन शर्तें रखीं — जिनमें अमेरिका से मुआवज़े की माँग भी शामिल है।

ट्रंप का बदलता गोलपोस्ट — एक नहीं, चार बार बदला लक्ष्य

CNN ने 7 मार्च की अपनी रिपोर्ट में लिखा कि अरब और यूरोपीय अधिकारियों को आज तक समझ नहीं आया कि ट्रंप का “endgame” क्या है — या कोई plan है भी या नहीं। इसकी वजह यह है कि ट्रंप का लक्ष्य खुद चार बार बदल चुका है।

तारीखपुराना लक्ष्यनया लक्ष्य
मार्च 2025 परमाणु कार्यक्रम बंद करवाओ, deal करो बातचीत, कूटनीति
जून 2025 परमाणु ठिकाने तबाह करो “हम जीत गए” — फिर भी आगे बढ़े
28 फरवरी 2026 परमाणु खतरा खत्म Regime Change — सरकार बदलो
7 मार्च 2026 Regime Change “UNCONDITIONAL SURRENDER” + अगला नेता हम चुनेंगे
⚠ Atlantic Council का विश्लेषण — 11 मार्च 2026

Atlantic Council के विशेषज्ञों ने 11 मार्च को साफ कहा कि ट्रंप और उनकी टीम ने इस युद्ध के लक्ष्यों को लेकर बार-बार असंगत बयान दिए हैं। Pentagon का कहना कुछ और है, ट्रंप का कुछ और।

पर्दे के पीछे रूस और चीन — ईरान का असली “ब्रेन”?

दोस्तों, यह युद्ध सिर्फ ईरान और अमेरिका के बीच नहीं है। CNN की 12 मार्च 2026 की ताज़ा रिपोर्ट कहती है कि रूस ईरान को अमेरिकी जहाज़ों, विमानों और सैनिकों की लोकेशन की खुफिया जानकारी दे रहा है। रूस ने यूक्रेन में इस्तेमाल किए गए ड्रोन टैक्टिक्स भी ईरान को सिखाए हैं।

और यह सब कब बदला? 9 मार्च 2026 को — जब पुतिन ने ट्रंप के साथ एक घंटे की “frank and businesslike” फोन कॉल की। Axios की उसी दिन की रिपोर्ट बताती है — यह 2026 में दोनों की पहली बातचीत थी। और इस कॉल को किसने request किया? व्हाइट हाउस ने — यानी ट्रंप को खुद पुतिन के पास जाना पड़ा।

Russia is providing intelligence help to Iran — including information about the locations and movements of American assets in the Gulf region.

— CNN Exclusive Report, 12 मार्च 2026 (Western intelligence official के हवाले से)

और क्या जवाब दिया Trump administration ने? Witkoff बोले — “रूस ने कहा है कि वे share नहीं कर रहे। Let’s hope that they’re not sharing.” यानी हम उन पर भरोसा कर लेते हैं।

🎯 Putin का असली खेल — CNN Analysis, 11 मार्च 2026

CNN ने लिखा — पुतिन इस संकट में अवसर ढूंढ रहे हैं। तेल $100 पार — रूस बड़ा तेल निर्यातक है। होर्मुज़ बंद तो रूस का तेल यूरोप को चाहिए। और अगर अमेरिका मध्य-पूर्व में उलझा रहा, तो यूक्रेन पर दबाव कम होगा। हर तरफ से पुतिन फायदे में।

ट्रंप ने यह युद्ध इसलिए शुरू किया था कि रूस और चीन पर दबाव बनाया जाए — ईरान को काबू करके उनकी ताकत को कम किया जाए। नतीजा? रूस अब ईरान को guide कर रहा है। चीन ईरान का तेल खरीद रहा है। और ट्रंप पुतिन से मदद माँग रहे हैं। पूरा plan उलटा पड़ गया।

Regime Change का सपना — कैसे बिखर गया?

ट्रंप की सबसे बड़ी गलती यह थी कि उन्होंने सोचा — खामेनेई को मारो, लोग सड़क पर आएंगे, सरकार गिरेगी, नई सरकार बनेगी। लेकिन National Intelligence Council का फरवरी 2026 का assessment पहले ही यह कह चुका था कि — “न सीमित हमलों से, न बड़े military campaign से — कोई भी scenario ईरान में regime change की guarantee नहीं देता।”

हुआ भी वही। जनवरी 2026 में विरोध प्रदर्शन हुए — लेकिन सुरक्षा बलों ने 30,000 से अधिक लोगों को मार दिया। और खामेनेई की मौत के बाद? IRGC और तमाम ईरानी नेताओं ने 8 मार्च को मोजतबा खामेनेई को नया सुप्रीम लीडर चुन लिया। कोई अराजकता नहीं। कोई टूटन नहीं। ईरान ने दशकों पहले इसी परिदृश्य की तैयारी कर रखी थी।

📌 NPR Report — 10 मार्च 2026

NPR ने रिपोर्ट किया कि IRGC के प्रवक्ता Ali Mohammad Naini ने ईरानी state media को बताया — “ईरान तय करेगा कि युद्ध कब खत्म होगा।” Iran के संसद अध्यक्ष Ghalibaf ने X पर लिखा — “हम ceasefire नहीं चाहते।”

ईरान की तीन शर्तें — और ट्रंप की शर्मिंदगी

11 मार्च 2026 को Al Jazeera ने रिपोर्ट किया कि ईरानी राष्ट्रपति पेज़ेशकियान ने युद्ध खत्म करने की तीन शर्तें रखी हैं। ये तीनों शर्तें अपने आप में ट्रंप के लिए एक करारा जवाब हैं।

01
बड़ी माँग
यूरेनियम संवर्धन का पूरा अधिकार

जिस चीज़ को रोकने के लिए यह पूरा युद्ध शुरू हुआ था, ईरान वही अधिकार माँग रहा है। यानी युद्ध का मूल मकसद ही हासिल नहीं हुआ।

02
गारंटी चाहिए
भविष्य में हमला न हो की पक्की अंतरराष्ट्रीय गारंटी

बातचीत के बीच दो बार हमला हो चुका है। ईरान अब कागज़ पर लिखित, अंतरराष्ट्रीय गारंटी माँग रहा है।

03
सबसे शर्मनाक
युद्ध में हुई क्षति का मुआवज़ा

अमेरिका और इज़राइल ने जो नुकसान किया है, उसका हर्जाना दो। जो जीतने गया था, वो अब मुआवज़ा देने की शर्त सुन रहा है।

यह वैसा ही है जैसे किसी की दुकान तोड़ने गए थे — और वो उलटे आपसे दुकान की मरम्मत का बिल माँग ले। CNBC की 6 मार्च की रिपोर्ट के अनुसार, जब ट्रंप ने Truth Social पर “UNCONDITIONAL SURRENDER” लिखा, तो Dow Jones 900 अंक गिर गया। बाज़ार समझ रहे हैं जो ट्रंप नहीं समझ रहे।

इतिहास की सबसे Miscalculated War?

New York Times ने रिपोर्ट किया कि ट्रंप और उनकी टीम ने सोचा ही नहीं था कि ईरान होर्मुज़ बंद कर देगा। उन्हें लगता था यह “containable” युद्ध होगा — बड़े आर्थिक झटके नहीं आएंगे। नतीजा? तेल $100 के पार। कतर के ऊर्जा मंत्री Saad al-Kaabi ने Financial Times को बताया — अगर होर्मुज़ बंद रहा तो कीमतें $150 प्रति बैरल तक जा सकती हैं।

German Chancellor Friedrich Merz ने Oval Office में ट्रंप से सीधे पूछा — यह युद्ध कैसे खत्म होगा? CNN के मुताबिक ट्रंप का जवाब “quite clear” नहीं था।

💬 NPR Report — 10 मार्च 2026

ट्रंप ने CBS News को बताया — “I think the war is very complete, pretty much.” और उसी दिन Republican lawmakers के सामने बोले — “We’ve already won in many ways, but we haven’t won enough.” यानी एक ही दिन दो अलग बातें।

🎯 निष्कर्ष — सच का हर पहलू

ट्रंप गए थे ईरान को बदलने — ईरान बदला नहीं। गए थे परमाणु कार्यक्रम खत्म करने — ईरान उलटे यूरेनियम का हक़ माँग रहा है। गए थे रूस-चीन पर दबाव बनाने — अब पुतिन से मदद माँग रहे हैं। और ईरान उन्हें युद्ध के नुकसान का बिल थमा रहा है।

यह युद्ध शायद आधुनिक इतिहास की सबसे बड़ी strategic miscalculation है। और खेल अभी बाकी है।

🙋 अक्सर पूछे जाने वाले सवाल

यह युद्ध 28 फरवरी 2026 को शुरू हुआ जब अमेरिका और इज़राइल ने ईरान के सुप्रीम लीडर खामेनेई को मारकर और ईरानी सैन्य ठिकानों पर हमले करके इसकी शुरुआत की। औपचारिक कारण था ईरान का परमाणु कार्यक्रम, लेकिन असल में ट्रंप Regime Change चाहते थे।

11 मार्च 2026 को ईरानी राष्ट्रपति पेज़ेशकियान ने तीन शर्तें रखीं: 1) यूरेनियम संवर्धन का पूरा अधिकार, 2) भविष्य में हमला न हो की पक्की अंतरराष्ट्रीय गारंटी, 3) अमेरिका-इज़राइल द्वारा युद्ध में किए गए नुकसान का मुआवज़ा।

CNN की 12 मार्च 2026 की exclusive रिपोर्ट के अनुसार, रूस ईरान को अमेरिकी जहाज़ों, विमानों और सैनिकों की लोकेशन की खुफिया जानकारी दे रहा है। रूस ने यूक्रेन में सीखे ड्रोन टैक्टिक्स भी ईरान को सिखाए हैं। रूस इससे इनकार करता है, लेकिन Trump administration भी “let’s hope they’re not sharing” से ज़्यादा कुछ नहीं कह पाई।

होर्मुज़ बंद होने से तेल की कीमतें $100 प्रति बैरल से ऊपर पहुंच गई हैं। कतर के ऊर्जा मंत्री ने Financial Times को बताया कि कीमतें $150 तक जा सकती हैं। दुनिया के कुल तेल का लगभग 20% इसी रास्ते से गुज़रता है।

9 मार्च 2026 को ट्रंप ने खुद पुतिन को फोन किया — यह 2026 में दोनों की पहली बातचीत थी। ट्रंप ईरान युद्ध से बाहर निकलने का रास्ता खोजना चाहते थे। पुतिन ने “Iran में जल्द political settlement” का प्रस्ताव दिया। Axios के अनुसार, White House ने ही यह कॉल request की थी।

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Deepak Chaudhary

भू-राजनीति पत्रकार | 8 वर्षों का अनुभव | 3 वर्षों से Vimarsh360.com के साथ। रोज़ शाम 7 बजे “Vimarsh with Deepak @7PM” — सच का हर पहलू।

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