ट्रंप से बुरी तरह खफा हैं खाड़ी देश —
ईरान युद्ध के बीच हैं दो बड़ी शिकायतें
मध्य पूर्व में आग लगी है।
और इस आग में जल रहे हैं वही देश — जिन्होंने कभी सोचा भी नहीं था कि उन्हें इस जंग का हिस्सा बनना पड़ेगा।
28 फरवरी 2026 को अमेरिका और इजरायल ने ईरान पर हमला किया। जवाब में ईरान ने खाड़ी देशों पर मिसाइलों और ड्रोन की बौछार कर दी।
अब सऊदी अरब, UAE, कुवैत, कतर, बहरीन और ओमान — सब निशाने पर हैं। और वे चुप नहीं हैं।
📌 28 फरवरी की रात — क्या हुआ था असल में?
बात सिर्फ हमले की नहीं है।
बात है उस रात की — जब वॉशिंगटन और तेल अवीव ने बम गिराए, और खाड़ी देशों को भनक तक नहीं थी।
वॉशिंगटन पोस्ट की रिपोर्ट और AP न्यूज एजेंसी के मुताबिक, दो खाड़ी देशों के अधिकारियों ने नाम न छापने की शर्त पर बताया कि उनकी सरकारें अमेरिका के इस तरीके से बेहद निराश हैं।
खाड़ी देशों को अमेरिकी-इजरायली हमले की पहले से कोई सूचना नहीं दी गई। अगर दी गई होती, तो वे ईरान के जवाबी हमले की तैयारी कर सकते थे।
🔥 दो बड़ी शिकायतें — जो बदल सकती हैं खेल
इतना ही नहीं। तीसरी नाराजगी भी उभर रही है।
खाड़ी देशों को लगता है कि अमेरिकी सेना का पूरा ध्यान इजरायल और अमेरिकी सैनिकों की सुरक्षा पर रहा — जबकि खाड़ी देशों को उनके हाल पर छोड़ दिया गया।
एक बड़ी मुसीबत ये भी है कि खाड़ी देशों के पास हमले रोकने वाले इंटरसेप्टर मिसाइलें तेजी से खत्म हो रही हैं।
📅 टाइमलाइन: कैसे यहां तक पहुंचे?
🎙️ विशेषज्ञों ने क्या कहा?
आधिकारिक बयान नहीं आए। लेकिन जो बोले — उन्होंने सब कुछ कह दिया।
यह नेतन्याहू का युद्ध है। उन्होंने किसी तरह राष्ट्रपति ट्रंप को अपने विचारों का समर्थन करने के लिए मना लिया।— प्रिंस तुर्की अल-फैसल, सऊदी अरब के पूर्व खुफिया प्रमुख | CNN, 5 मार्च 2026
Foreign Policy की गहन रिपोर्ट के अनुसार, खाड़ी नेताओं को लगता था कि ट्रंप के साथ उनके संबंध पहले से कहीं बेहतर हैं।
उन्हें ट्रंप की व्यापारिक सोच पसंद थी। गाजा मुद्दे पर उनका रुख पसंद था। लेकिन अब विश्वासघात की भावना बहुत गहरी है।
खाड़ी देशों को अब यह स्वीकार करना पड़ रहा है कि अमेरिका उन्हें अस्तित्व के खतरे से नहीं बचा सकता।— Foreign Policy विश्लेषण | मार्च 2026
Eurasia Group के वरिष्ठ ईरान विश्लेषक Gregory Brew ने The Hill को बताया कि खाड़ी देश अभी भी सीधे ईरान पर हमला करने से बचना चाहते हैं — वे अपनी रक्षा करना चाहते हैं, आक्रमण नहीं।
⚠️ कितनी बड़ी है खाड़ी देशों की मुसीबत?
ईरान के लिए खाड़ी देश “आसान निशाना” क्यों हैं? तीन कारण हैं —
| देश | मिसाइलें दागी | ड्रोन | स्थिति |
|---|---|---|---|
| 🇦🇪UAE | 189 | 941 (876 रोके) | 🔴 गंभीर |
| 🇸🇦सऊदी अरब | बड़ी संख्या | बड़ी संख्या | 🟠 खतरे में |
| 🇰🇼कुवैत | — | — | 🔴 6 अमेरिकी सैनिक मारे |
| 🇶🇦कतर | — | — | 🟠 LNG बंद, आर्थिक नुकसान |
| 🇧🇭बहरीन | — | — | 🟡 अमेरिकी बेस पर खतरा |
Pentagon के अधिकारियों ने सांसदों के साथ बंद कमरे में हुई ब्रीफिंग में स्वीकार किया कि वे ईरान के ड्रोन हमलों की लहरों को रोकने में संघर्ष कर रहे हैं।
ट्रंप ने समुद्री व्यापार को बचाने के लिए बीमा और टैंकर एस्कॉर्ट की घोषणा की है। लेकिन सवाल यह है — क्या यह काफी है?
पूर्व अमेरिकी राजदूत Michael Ratney ने कहा: “जो भी अगला होगा — उसका बोझ खाड़ी देशों को ही उठाना पड़ेगा।” अब खाड़ी देश अमेरिका पर भरोसा करें — या खुद का रास्ता तलाशें?







